Words can create magic and I want to get lost in them for some part of each day.

August 20, 2012

Regret .


Regret
A yellow blade of grass
Tip singed with the Heat of Despair
There is no water to Green it
Yet the Roots
Cling to some Moisture of Hope.

August 2, 2012

बारिश के बाद .

रात भर बूँदें गिरती रही .
सुबह देखा तो :
नज़ारे सब नए थे .
पेड़ नहा के सब चमक गए थे।

थोडा झुक कर  
खुद को पानी में निहार रहा था 
नन्हा सजीला नींबू 

पीपल अपने हर पत्ते की नोक पर 
थामे था एक सुनहरी बूँद 
जैसे त्योहारी की तैयारी में  लड़ियाँ पिरो  रखी  हों .

और मालती की बेल 
यूं लहरा रही थी अपनी महकती लटें 
जैसे अभी-अभी shampoo कर 
अपने बाल झटक रही हो। 

June 28, 2012

The Psychology of Geology .

If you make your Heart
An Open Cast Mine.
Always digging deep
Trawling,unearthing
sifting and sorting
Motives and Causes
Don't get surprised
when Old wounds surface
or New Ones
Take Root .
The Psychology
Of Geology
kills all that is life-giving
and leaves
scarred landscapes behind .

दिल्ली के खँडहर।


दिल्ली के खामोश पुराने खँडहर देखे,
 तो इक भूला सा स्वाद याद आया...
तुमने अन्नानास की शराब पी है ?
बिलकुल इस शहर की तरह होती है -
जिसका कांटेदार, खुरदुरा, बदसूरत छिलका हटाने से 
रस मिलता है ,
मिठास भी ,
सदियों को उसमें जितना घोलो 
आता है उतना ही उम्दा स्वाद भी।

June 5, 2012

Delhi - II.


शोर मचाती सडकों  के किनारे खड़े खँडहर 
चुप-चाप क्या -क्या बोल जाते हैं। 
हँस  के कहते हैं -
चाहे कितनी सड़कें नाप लो 
सभी मकतल और मकबरों तक ही जाती हैं। 
बचता  कोई नहीं:
न सल्तनत न बादशाही ; न सोना ,न चांदी :
बस रह जाते है -
कुछ अनदेखे -कुछ अनबूझे ,बिखरे से पत्थर 
जिनपे नाम उकेरने को सभी बेताब रहते हैं 
पर जिनकी कहानी सुनने की अब फुर्सत किसे है ...

June 2, 2012

अमलतास .


मैंने देखा है 
अशर्फियों का पेड़ 
सोने के मुहरों के गुच्छे लटकते हैं 
ऐसे चमकता है कि -
सूरज भी कुछ देर शरमा  जाता  है 
और कहता है 
अच्छा , तुम जीते अमलतास -
मेरे सोने की आग तो झुलसाती भी है ,
पर तुम्हारा सोना तो दिल को तपन में भी ठंडक देता है :
अच्छा ,अब मानो  बात -
जाओ जाके कुछ पत्ते  पहन लो :)

May 24, 2012

जी चाहता है ...

कई रोज़, किसी काले  बादल को खोल कर गटागट पीने को ,
या आसमान की नीली चादर ओढ़ कर सोने को जी चाहता है।

उपले ,बाड़े ,फूस ,खेत सूंघने का 
या गीली मिट्टी में खेलने -लोटने का जी चाहता है।

लक्ष्मी गाय ,मोती कुत्ता , मोटा बिल्ला सब पर प्यार जताने को ,
या बिन नाम की ढीठ ,शोर मचाती मुर्गियों पर झूठ -मूठ गुस्साने को जी चाहता है।

किसी ऊंचे  से टीले पर चढ़ कर बोल लगाने का -
जो छूट गया है - उसे वापस बुलाने का जी चाहता है।

आ तो गयी मैं सधे क़दमों से बहुत दूर  तक 
पर अचानक मुड़ कर दौड़ जाने का जी चाहता है।

जानती हूँ , कि जिस गोबर लिपे  आँगन में  मैंने 
इत्मीनान की  चारपाई  बिछाई थी :

वह अब बस सपना है -
फिर भी जाने ये दिल क्या -क्या चाहता  है।

May 14, 2012

The coils of Oil.

Navigating Oil 
is a tricky Business .
Like the Pakora ,
At right temperatures ,
You may puff up with self -importance 
And feel like a hot-shot for a while.
But a bit of squeezing or freezing 
and all you get is 
a blob of sad and soggy distasteful mess.
For thats what is left 
of the real you -
minus the oil .

May 8, 2012

पहिया .

कभी  कभी लगता है :
मैं  सिर्फ एक पहिया हूँ -

बस मील मापती  रहती  हूँ 
और धूल फाँकती  रहती हूँ 

हर मंज़िल मुझसे बेखबर 
है फिरना मुझ को दर-ब -दर 

उनींदी आँखें लिए जागती रहती हूँ 
बस पड़ाव ताकती रहती हूँ 

मेरे चलने से ही सब कुछ चलता है 
फिर भी , बस ठहराव की मोहलत मांगती रहती हूँ।

May 2, 2012

Friends and Relations.

न दोस्तों में करते हैं ,न दुश्मनों में करते हैं 
उनकी गिनती अब हम बर्फ़ाब अना की पथराई हुई लकीरों में करते हैं।

***
माना की अक्सर दोस्ती के लिबास में अगियार मिले
मगर रहजन इत्तेफाक़न कई दिलदार मिले।
कभी दो मिले ,कभी चार मिले -
भीड़ में कुछ तो अपने यार मिले। 
***