Words can create magic and I want to get lost in them for some part of each day.

May 24, 2012

जी चाहता है ...

कई रोज़, किसी काले  बादल को खोल कर गटागट पीने को ,
या आसमान की नीली चादर ओढ़ कर सोने को जी चाहता है।

उपले ,बाड़े ,फूस ,खेत सूंघने का 
या गीली मिट्टी में खेलने -लोटने का जी चाहता है।

लक्ष्मी गाय ,मोती कुत्ता , मोटा बिल्ला सब पर प्यार जताने को ,
या बिन नाम की ढीठ ,शोर मचाती मुर्गियों पर झूठ -मूठ गुस्साने को जी चाहता है।

किसी ऊंचे  से टीले पर चढ़ कर बोल लगाने का -
जो छूट गया है - उसे वापस बुलाने का जी चाहता है।

आ तो गयी मैं सधे क़दमों से बहुत दूर  तक 
पर अचानक मुड़ कर दौड़ जाने का जी चाहता है।

जानती हूँ , कि जिस गोबर लिपे  आँगन में  मैंने 
इत्मीनान की  चारपाई  बिछाई थी :

वह अब बस सपना है -
फिर भी जाने ये दिल क्या -क्या चाहता  है।