Words can create magic and I want to get lost in them for some part of each day.

August 2, 2012

बारिश के बाद .

रात भर बूँदें गिरती रही .
सुबह देखा तो :
नज़ारे सब नए थे .
पेड़ नहा के सब चमक गए थे।

थोडा झुक कर  
खुद को पानी में निहार रहा था 
नन्हा सजीला नींबू 

पीपल अपने हर पत्ते की नोक पर 
थामे था एक सुनहरी बूँद 
जैसे त्योहारी की तैयारी में  लड़ियाँ पिरो  रखी  हों .

और मालती की बेल 
यूं लहरा रही थी अपनी महकती लटें 
जैसे अभी-अभी shampoo कर 
अपने बाल झटक रही हो।