Words can create magic and I want to get lost in them for some part of each day.

June 5, 2012

Delhi - II.


शोर मचाती सडकों  के किनारे खड़े खँडहर 
चुप-चाप क्या -क्या बोल जाते हैं। 
हँस  के कहते हैं -
चाहे कितनी सड़कें नाप लो 
सभी मकतल और मकबरों तक ही जाती हैं। 
बचता  कोई नहीं:
न सल्तनत न बादशाही ; न सोना ,न चांदी :
बस रह जाते है -
कुछ अनदेखे -कुछ अनबूझे ,बिखरे से पत्थर 
जिनपे नाम उकेरने को सभी बेताब रहते हैं 
पर जिनकी कहानी सुनने की अब फुर्सत किसे है ...