Words can create magic and I want to get lost in them for some part of each day.

April 12, 2012

लोधी गार्डन .

लोधी गार्डन :

मेरी राहत -ए - जाँ ; मेरा सुकूत -ए- यास  है 
बेरुखी दिल्ली के दिल पर बिछी शबनमी घास है .

घने पेड़ ,पानी ,परिंदे ,फूल यहाँ खूब हैं 
जाने कांक्रिती जंगल में ये मंगल  कैसे महफूज़ है ?

ज़रूर कोई तिलिस्म होगा इन मकबरों और मज़ारों का -
या जादू होगा चुपचाप खड़ी पुरानी दीवारों का .

क्योंकि :

अक्सर इस शहर में ऐसी दीवारें कांच और सीमेंट तले दबी- छिपी दीखती हैं 
और हरियाली को गमलों में टांग दिया जाता है ,किसी momento की तरह .

कायम रहे यूं ही ये :

किसी हमदर्द की मेहेरबानी की तरह
सहरा में पानी की तरह 

खुदा के साथ की तरह 
दुआ के हाथ की तरह .