Words can create magic and I want to get lost in them for some part of each day.

October 21, 2010

बच्चों के साथ हाट-बाज़ार.


धक्का-मुक्की और आवाजें
कर लो फ़ल ,सब्जी,मिटटी से बातें.

पके टमाटर ,हरे  मटर.
कद्दू , परवल ,लाल चुकंदर .

टोकरों से ताके हैं गुट-गुट 
पालनों में नन्हों के माफिक .

ऐंठ रहे हैं मूली-गाजर 
गोभी रानी का साथ पाकर.

भीड़ में ग़ुम हैं आलू राजा 
बैगन  याद दिलाये भाजा .

खींच रही सीताफल की महक.
लुभा रही हरे लहसुन की लहक  .

चिकने अमरुद चमकाएँ आँखें
हरे चने , आंवलें  को ताकें .

अंजीर रसभरी की बाहों में डोला 
मैं मिठास तू रस है बोला .

ख़ुदा  ने क्या रंग और स्वाद को घोला !
क्यों तुम्हें चाहिए टॉफी -कोला ?

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